Friday, February 16, 2024

किसान आंदोलन 2.0

                                     किसान आंदोलन 2.0


किसान आंदोलन हमारे देश का एक बहुत ही गंभीर और नाज़ुक मुद्दा है।इस आंदोलन के चलते पूरा भारत प्रभावित है।2022 से शुरू हुआ ये आंदोलन अब 2024 में अपना 2.0 रूप ले चुका है। किसानों का दावा है कि उनकी माँगे पूरी नहीं की गई जिनका वादा सरकार द्वारा किया गया था। इसी मुद्दे को लेकर मैंने अपने देश के कुछ युवाओं से बात की और कुछ प्रश्न पूछे जिनका जवाब उन्होंने बखूबी दिया। 

तो चलिए एक बार उन्हीं प्रश्नोत्तर पर अपनी नज़र डालते है और इस मुद्दे को और अच्छे से जानते हैं।


प्रश्न 1:पंजाब में चल रहे किसान आंदोलन के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर:पंजाब में चल रहे किसान आंदोलन के पीछे मुख्य कारण भारत सरकार द्वारा तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का पारित होना है, जिसके बारे में किसानों का मानना है कि इससे कृषि का कॉर्पोरेटीकरण हो जाएगा, उनकी सौदेबाजी की शक्ति कम हो जाएगी और मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खत्म हो जाएगा। ) प्रणाली।


प्रश्न 2:किसान आंदोलन ने पंजाब में कृषि समुदाय को कैसे प्रभावित किया है?

उत्तर:किसान आंदोलन ने पंजाब में कृषि समुदाय पर गहरा प्रभाव डाला है, क्योंकि राज्य के किसान विरोध में सबसे आगे हैं। इसने विभिन्न पृष्ठभूमियों और क्षेत्रों के किसानों को एक साथ लाया है, जो कृषि कानूनों को निरस्त करने और अपनी फसलों के लिए एमएसपी के आश्वासन की मांग को लेकर एकजुट हुए हैं।


प्रश्न 3:पंजाब के किसान जिन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, वो कौन कौन से क़ानून है?

उत्तर: न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य के लिए कानून बनाया जाए

स्‍वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए.

किसान कृषि ऋण भी माफ करने की मांग कर रहे हैं.

लखीमपुर खीरी मामले पर किसान परिवार को मुआवजा दिया जाए.

किसानों को प्रदूषण कानून से बाहर रखा जाए.

कृषि वस्‍तुओं, दूध उत्‍पादों, फल और सब्जियों और मांस पर आयात शुल्‍क कम करने के लिए भत्‍ता बढ़ाया जाए.

58 साल से अधिक उम्र के किसानों के लिए पेंशन योजना लागू कर उन्‍हें 10 हजार रुपए मासिक पेंशन दी जाए.

कीटनाशक, बीज और उर्वरक अधिनियम में संशोधन करके कपास सहित सभी फसलों के बीजों की गुणवत्‍ता में सुधार किया जाए.

भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को उसी तरह से लागू किया जाए. इस संबन्‍ध में केंद्र सरकार की ओर से राज्‍य सरकार को दिए निर्देशों को रद्द किया जाए.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार के लिए सरकार की ओर से स्‍वयं बीमा प्रीमियम का भुगतान किया जाए, सभी फसलों को योजना का हिस्‍सा बनाया जाए और नुकसान का आकलन करते समय खेत एकड़ को एक इकाई के रूप में मानकर नुकसान का आकलन किया जाए.


प्रश्न 4:समय के साथ विरोध कैसे विकसित हुआ है, और किसानों ने अपनी मांगों को बढ़ाने के लिए क्या रणनीति अपनाई है?

उत्तर: विरोध समय के साथ विकसित हुआ है, किसानों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन, ट्रैक्टर रैलियों और राजमार्गों और रेलवे को अवरुद्ध करने जैसी प्रतीकात्मक कार्रवाइयों जैसे विभिन्न माध्यमों से अपना आंदोलन तेज कर दिया है। वे सरकार के साथ बातचीत में भी शामिल हुए हैं, देशव्यापी हड़तालों में भाग लिया है और अपनी मांगों को बढ़ाने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन हासिल किया है।


प्रश्न 5:पंजाब के समृद्ध कृषि इतिहास ने किसान आंदोलन को आकार देने में क्या भूमिका निभाई है?

उत्तर: पंजाब के समृद्ध कृषि इतिहास, जिसकी विशेषता इसकी हरित क्रांति की सफलता और अतीत में मजबूत किसान आंदोलन हैं, ने किसान आंदोलन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य के किसानों में संगठित सामूहिक कार्रवाई की लंबे समय से चली रही परंपरा है और वे अपनी आजीविका की रक्षा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि सुधारों की मांग करने में सबसे आगे रहे हैं।


प्रश्न 6: किसान आंदोलन के चलते एक आम आदमी की दिनचर्या पर क्या असर पड़ता है? सड़कों पर उतर कर पब्लिक प्रॉपर्टी का नुक़सान करना और आम आदमी को तंगी देना कहाँ तक सही है ?

उत्तर: किसान आंदोलन, जो किसानों के अधिकार और मांगों के लिए होता है, उसका असर आम आदमी की जिंदगी पर विभिन्न तरीकों से पड़ता है। इस आंदोलन के दौरान, आम आदमी को कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे सड़कों पर बंधन, ट्रैफिक में बदलाव, या व्यापार में रुकावत।आंदोलन के तेवर पर निर्भर करता है कि क्या तक यह सही है। आम आदमी को असुविधाओं का सामना करना तो चाहिए, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुक्सान पहुंचाना या आम लोगों को आंदोलन की मंशा से परेशान होना पड़ता है।

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना देश के विकास में बड़ी रुकावट डालता है और समाज में अशांति फैलाता है। आंदोलन को प्रशिक्षण और संवेदना के साथ जाना चाहिए, ताकि समस्याओं का हल निकल सके बिना आम लोगों को नुकसान पहुंचाया जा सके।


अंतः मैं इस नतीजे पर पहुँची की हर एक चीज़ के दो पहलू होते है कुछ सही और कुछ ग़लत और इस मुद्दे में भी दोनों हैं। एक तरफ़ किसान है जो अपने हक्क के लिए लड़ रहे हैं और एक तरफ़ आम जनता। तो संभवतः हमे मुद्दों को शांति पूर्वक सुलझा लेना चाहिए और इस तरीक़े से करना चाहिए कि किसी का नुक़सान ना हो। इस इंटरव्यू के बाद पता चला कि हमारा युवा कितना जागरूक है अपने देश के मुद्दों के बारे में और अपना एक तर्क रख रहे हैं।


No comments:

Post a Comment

Ignored Corners: The Poor Roads and Sewage Outside LPU

As a  student who has been living near Lovely Professional University (LPU) for the past three years, one thing that has remained unchanged...