आज यूहीं रोज़ की तरह मैं कॉलेज जाने के लिए तैयार हुई और घर से निकल पड़ी। पहले तो एक ऑटो में बस स्टैंड पहुँची और वहाँ से बस लेने के लिए खड़ी हो गई। वही मेरी दूसरी और एक आदमी खड़ा था देखने में हट्टा कट्टा हाथ में पानी की बॉटल लिए और वो मेरी तरफ़ देखने लगा मैं ज़रा जल्दी में थी तो मैंने ध्यान नहीं दिया ।वहाँ और भी कई लोग मौजूद थे उसने किसी से कुछ नहीं कहा सिर्फ़ मुझे देखने लगा और रोटी माँगने लगा मेरे पास उस समय खुल्ले पैसे भी नहीं थे की मैं उसे दे पाऊ तो मैंने उसे नज़र अन्दाज़ किया और इतने में मेरी बस आ गई और मैं दोड़ कर बस की तरफ़ चल दी और जब मैं जाने लगी तो वो व्यक्ति पीछे से मुझे बद्दुआ देने लगा कि जा तेरा कोई काम नहीं बनेगा मुझे तूने रोटी नहीं दी और भी बहुत कुछ। और उस समय मुझे बहुत बुरा लगा कि मानो मैंने कोई गुनाह कर दिया हो। और हाँ हमारे माँ बाप ने हमे भी शिक्षा दी है कि ग़रीबो की मदद करनी चाहिए जो काम नहीं कर पाते बुज़ुर्ग लोग और अपाहिज लोग। वह व्यक्ति एक दम हस्त पुस्त था और केवल मुझसे माँग रहा था वहाँ और बहुत लोग थे परंतु किसी और से भी माँगने के बजाए वो मुझे बद्दुआ देने लगा। क्या ये सही था ? किसी को बिना जाने उसे बद्दुआ देना ठीक था? मैं आज भी उस दिन को नहीं भूल पायी हूँ । और ना कभी भूलूँगी क्योंकि आज से पहले मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ । कई बार व्यक्ति के पास इतने पैसे नहीं होते की वो किसी को दे पाये पर दूसरे व्यक्ति को बद्दुआ देना कहाँ तक ठीक है ?? ये दूसरे व्यक्ति के मन पर कितना ग़लत प्रभाव दल सकती है यह उसे अंदाज़ा नहीं बस जो उस व्यक्ति को नहीं मिला तो उसने किसी और को बुरा भला कहना शुरू कर दिया ।
Tuesday, October 31, 2023
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